सूर्य देव · आस्था का महापर्व

छठ के गीत

जहाँ उगते सूरज से नदी मिलती है, वहाँ हर सूप में एक प्रार्थना होती है। नहाय-खाय, घाट और उस सुनहरी सुबह के लिए—ये गीत उसी अपनापन के नाम।

“काँच ही बाँस के बहंगिया...”

— घाट की एक याद

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